किरदार हमेशा कलाकार से बड़ा होता हैं। कलाकार के तामझाम के पीछे का कलाकार दिखाना एक उम्दा कलाकार की पहचान हैं। याद कीजिए वो सभी पसंदीदा किरदार जिन्हें हमने बड़े परदे पर देखा, सराहा और अपनाया। असल में वही किरदार आज अमर हैं और हमेंशा रहेंगे जिन्हें अदा करने वाले अभिनेता या अभिनेत्री ने खुद से ज्यादा तरजीह दी।
अभिनेता राजेश खन्ना की ख्याति किसी भी दौर में किसी से भी छिपी नहीं रही। उनके द्वारा जीवंत किया गया हर किरदार पहले वह किरदार लगता हैं फिर राजेश खन्ना। साल 1971में आई फिल्म आनंद को कौन भूल सकता है। आनंद की कहानी को देखते हुए हमें नहीं लगता कि हम परदें पर किसी स्टार को देख रहे हैं, लगता है कि ये आनंद ही हैं और ये उसकी कहानी।
ऋषिकेश मुखजी की ही 1980 में आयी फिल्म खूबसूरत में अभिनेत्री रेखा का किरदार मंजू। अपने दौर की स्टाइल आइकॉन और ग्लैमरस रेखा मंजू के किरदार मे बेहद सहज और साधारण लगी हैं मानो घर की ही कोई सदस्या। कहा जा सकता हैं कि ये कहानी कहने वाले पर भी निभर्र करता है पर ये भी सच है कि अभिनेता ही परदे पर किरदार को उकेरता है।
समकालीन फिल्मों में ये कला थोड़ी मुश्किल हुईं हैं। स्टार कल्चर में किरदार को खोजना ज़रा मुश्किल जान पड़ता है। कम ही ऐसे कलाकार है जो यकीन करवा पाते हैं, ये उन कलाकारों की श्रेष्ठता ही हैं।
40 साल की उम्र के ऊपर के अभिनेता आमिर खान 3 इडियट में 23-24साल के छात्र हैं। असल में उनके प्रिंसिपल की भूमिका करने वाले बमन ईरानी से महज 6 साल ही छोटे हैं पर ये एक कलाकार की कला ही है जो हमें उन किरदारो पर यकीन करवाती हैं।
ऐसा नहीं हैं , बहुत से किरदार काफ़ी बार स्टार चकाचौंध से निकल ही नहीं पाते। उमंग कुमार की फिल्म सरबजीत में अभिनेत्री ऐश्वर्या राय में दलवीर कौर को देखना मुश्किल था। यही हाल सोनम कपूर के पीछे नीरजा का हुआ। सुल्तान में सलमान ख़ान हटे नहीं कि उनका किरदार नज़र आ पाता।
फिल्म निर्माण एक टीम वरक है, इसमें सिर्फ स्टार को दोष नहीं दिया जा सकता। शायद हम जिस दौर में हैं, वहां स्टारडम इतना हावी है कि हम चाह कर भी कलाकार और किरदारों को अलग नहीं कर पाते। अभिनेता किरदार पर हावी हो ही जाता हैं, निस्संदेह कुछ अपवाद हमेशा रहते हैं।
Wednesday, November 29, 2017
किरदार से कलाकार
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